यह केवल उत्सव नही पारस्परिक प्रेम का प्रस्तुतिकरण है... आइए हिन्दी को नया आयाम दिलाएँ... हम सब मिलकर ब्लॉग उत्सव मनाएँ...

परिकल्पना की नयी, किन्तु अनोखी पहल

शुक्रवार, 3 सितम्बर 2010
















कहते हैं समय ठहरता नहीं , मौसम बदलते हैं , तेवर बदलते हैं , चाँद भी पूर्णता से परे होता है
और अमावस की रात आती है ... यूँ कहें अमावस जीवन का सत्य है, एक अध्यात्म की खोज -
जहाँ से ज्ञान मार्ग शुरू होता है ........
यह कहना है कवियित्री रश्मि प्रभा का , जिनके संचालन-समन्वयन में आज से वटवृक्ष का शुभारंभ किया जा रहा है

वटवृक्ष पर आज पढ़िए-
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