यह केवल उत्सव नही पारस्परिक प्रेम का प्रस्तुतिकरण है... आइए हिन्दी को नया आयाम दिलाएँ... हम सब मिलकर ब्लॉग उत्सव मनाएँ...

सितारों की महफ़िल में आज जी. के. अवधिया

सोमवार, 2 अगस्त 2010

जी.के. अवधिया जी एक संवेदनशील, सादे विचार वाले, सरल, सेवानिवृत व्यक्ति हैं । इन्हें अपनी मातृभाषा हिंदी पर गर्व है। आप सभी लोगों का स्नेह प्राप्त करना तथा अपने अर्जित अनुभवों तथा ज्ञान को वितरित करके आप लोगों की सेवा करना ही इनकी उत्कृष्ट अभिलाषा है। विगत दिनों ब्लोगोत्सव-२०१० के दौरान एक साक्षात्कार के क्रम में इनके द्वारा हिंदी चिट्ठाकारी के उन्नयन के सन्दर्भ में की गयी सकारात्मक टिप्पणियों को हिंदी ब्लॉग जगत में काफी सराहा गया , इसी के दृष्टिगत ब्लोगोत्सव की टीम ने इन्हें वर्ष का श्रेष्ठ विचारक के रूप में अलंकृत करते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है . "जानिये अपने सितारों को " के अंतर्गत प्रस्तुत है आज श्री अवधिया जी से पूछे गए कुछ प्रश्नों के उत्तर-


(१) पूरा नाम:
गोपाल कृष्ण अवधिया
(२) (क) पिता का नामः स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया
(ख) माता का नामः स्व. श्रीमती कैलाशवती अवधिया
(ग) जन्म स्थान: रायपुर (छत्तीसगढ़)
(३) (क) वर्तमान पता: अवधिया पारा, रायपुर ४९२००१ (छत्तीसगढ़)
(ख) ई मेल का पता: gkawadhiya@gmail.com
(ग) टेलीफोन/मोबाईल न.: 9753302502
(४) आपके प्रमुख व्यक्तिगत ब्लॉग:
हिन्दी वेबसाइट, धान के देश में, संक्षिप्त वाल्मीकि रामायण, बातें कम्प्यूटर की, रामचरितमानस कथा
(५) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त अन्य ब्लॉग पर गतिविधियों का विवरण:चर्चा पान की दुकान पर,Science Bloggers' Association,भारत-ब्रिगेड,छत्तीसगढ़
(६) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त आपको कौन कौन सा ब्लॉग पसंद है?
भाषा, साहित्य, समाज की सेवा में रत तथा विशिष्ट जानकारी वाले समस्त ब्लॉग
(७) ब्लॉग पर कौन सा विषय आपको ज्यादा आकर्षित करता है?
देश एवं समाज के उत्थान से सम्बन्धित समस्त विषय
(८) आपने ब्लॉग कब लिखना शुरू किया ?
अंग्रेजी ब्लोग सन् २००६ से तथा हिन्दी ब्लोग ०३‍-०९-२००७ से
(९) यह खिताब पाकर आपको कैसा महसूस हो रहा है?
सम्मान प्राप्त कर के मनुष्य को गर्व होता है; मैं भी एक साधारण व्यक्ति हूँ अतः स्वयं को गर्वान्वित अनुभव कर रहा हूँ
(१०) क्या ब्लोगिंग से आपके अन्य आवश्यक कार्यों में अवरोध उत्पन्न नहीं होता ?
अवश्य होता है किन्तु अपनी रुचि के कार्य करने के लिये अतिरिक्त समय निकालना ही पड़ता है।
होता है तो उसे कैसे प्रबंध करते है?
जहाँ चाह है वहाँ राह है! किसी न किसी प्रकार से व्यवस्था कर ही लेता हूँ।
(११)ब्लोगोत्सव जैसे सार्वजनिक उत्सव में शामिल होकर आपको कैसा लगा ?
बहुत ही प्रसन्नता का अनुभव हुआ।
(१२) आपकी नज़रों में ब्लोगोत्सव की क्या विशेषताएं रही ?
ब्लोगरों को एक मंच पर एकत्रित करना तथा उनके विचारों प्रचार-प्रसार करना
(१३) ब्लोगोत्सव में वह कौन सी कमी थी जो आपको हमेशा खटकती रही ?
खटकने वाली कोई कमी दृष्टिगत नहीं हुई
(१४) ब्लोगोत्सव में शामिल किन रचनाकारों ने आपको ज्यादा आकर्षित किया ?
समस्त रचनाकारों के अपने-अपने अलग-अलग आकर्षण थे, उनके आकर्षण में कमी-बेसी निकालना, मेरे विचार से, उचित नहीं है।
(१५) किन रचनाकारों की रचनाएँ आपको पसंद नहीं आई ?
पसन्द नहीं आने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता।
(१६) क्या इस प्रकार का आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाना चाहिए ?
अवश्य!
(१७) आपको क्या ऐसा महसूस होता है कि हिंदी ब्लोगिंग में खेमेवाजी बढ़ रही है ?
ऐसा आभास होता तो है
(१८) क्या यह हिंदी चिट्ठाकारी के लिए अमंगलकारी नहीं है ?
जी हाँ, अमंगलकारी ही है।
(१९) आप कुछ अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताएं:
मैं एक अत्यन्त ही साधारण व्यक्ति हूँ और मेरा व्यक्तिगत जीवन सामान्य ही रहा है। चार भाइयों और एक बहन में ज्येष्ठ होने के कारण जिम्मेदारियाँ अधिक रहीं किन्तु परमात्मा की कृपा से उन्हें निबाहता रहा। विशेष उल्लेखनीय बात कभी रही ही नहीं मेरे जीवन में।
(२०) चिट्ठाकारी से संवंधित क्या कोई ऐसा संस्मरण है जिसे आप इस अवसर पर सार्वजनिक करना चाहते हैं ?
हिन्दी चिट्ठाकारी शुरू की मैंने अपने स्वर्गीय पिता श्री हरिप्रसाद अवधिया की रचनाओं को इंटरनेट में प्रकाशित करने के लिये। स्वयं मैंने कभी कुछ लिखा नहीं था किन्तु चिट्ठाकारी ने लिखना सिखा दिया।
(२१) अपनी कोई पसंदीदा रचना की कुछ पंक्तियाँ सुनाएँ: (यदि आप चाहें तो यहाँ ऑडियो/विडिओ का प्रयोग भी कर सकते हैं )
गाना मुझे आता नहीं है इसलिये गाकर नहीं सुना सकता किन्तु श्री मैथिलीशरण गुप्त जी के खण्डकाव्य "पंचवटी" की निम्न पंक्तियाँ मुझे बहुत पसन्द हैं

नहीं विघ्न-बाधाओं को हम, स्वयं बुलाने जाते हैं,
फिर भी यदि वे आ जायें तो, कभी नहीं घबड़ाते हैं।
मेरे मत में तो विपदाएँ, हैं प्राकृतिक परीक्षाएँ,
उनसे वही डरें, कच्ची हों, जिनकी शिक्षा-दीक्षाएँ॥

कहा राम ने कि "यह सत्य है, सुख-दुख सब है समयाधीन,
सुख में कभी न गर्वित होवे, और न दुख में होवे दीन।
जब तक संकट आप न आवें, तब तक उनसे डर माने,
जब वे आजावें तब उनसे, डटकर शूर समर ठाने॥


बहुत बहुत धन्यवाद अवधिया जी .....इस अवसर पर ऋग्वेद की दो पंक्तियां आपको समर्पित है कि - ‘‘आयने ते परायणे दुर्वा रोहन्तु पुष्पिणी:। हृदाश्च पुण्डरीकाणि समुद्रस्य गृहा इमें ।।’’अर्थात आपके मार्ग प्रशस्त हों, उस पर पुष्प हों, नये कोमल दूब हों, आपके उद्यम, आपके प्रयास सफल हों, सुखदायी हों और आपके जीवन सरोवर में मन को प्रफुल्लित करने वाले कमल खिले।

आपका भी धन्यवाद

प्रस्तुति : रवीन्द्र प्रभात

9 comments:

गीतेश ने कहा…

जी. के. अवधिया जी को हार्दिक बधाई और आपको धन्यवाद जो इतना वर्गीकरण करके सही व्यक्ति का चुनाव किया है ....अवधिया जी वाकई इस सम्मान के हक़दार हैं , पुन: बधाईयाँ !

पूर्णिमा ने कहा…

जी. के. अवधिया जी को हार्दिक बधाई !

mala ने कहा…

जी. के. अवधिया जी को हार्दिक बधाई

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…


अवधिया जी के बारे में काफी कुछ जानने को मिला। आभार एवं बधाई।

…………..
स्टोनहेंज के रहस्यमय पत्थर।
क्या यह एक मुश्किल पहेली है?

Dr Subhash Rai ने कहा…

bbadhaai Avadhiya jee

Udan Tashtari ने कहा…

जी. के. अवधिया जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ.

Rajendra Swarnkar ने कहा…

बधाई अवधिया जी !

वर्ष का श्रेष्ठ विचारक के रूप में अलंकृत - सम्मानित होने पर

- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं

सलीम ख़ान ने कहा…

badhaee !

खुशदीप सहगल ने कहा…

अवधिया जी जैसा कर्मयोगी और ब्लॉगिंग का साधक पूरे हिंदी ब्लॉगवुड में और कोई नहीं है...मेरा उनसे ब्लॉगिंग में पहला परिचय छोटी सी मुठभेड़ के साथ हुआ था...उसके बाद से मैं उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का मुरीद हूं...सेंस ऑफ ह्यूमर में भी मैं खुद को अवधिया जी का शागिर्द मानता हूं...अवधिया जी को इस सम्मान के लिए बहुत-बहुत बधाई...

रवींद्र जी और ब्लॉगोत्सव २०१० टीम का आभार...

जय हिंद...

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