देश, विदेश .... मेरा शहर, तेरा शहर सब रंग गए हैं उत्सवी रंग में . सबके होठों पर गीत मचल उठे हैं ... कुछ इस तरह-







( चलो तुमको लेकर...अपराजिता कल्याणी)

3 comments:

Udan Tashtari ने कहा… 10 जून 2010 को 5:12 pm

संगीत का ज्ञान और स्वर की मिठास झलक रही है इस गायिका में..बधाई.

mala ने कहा… 10 जून 2010 को 5:13 pm

सुन कर मन प्रसन्न हुआ.बधाई।

पूर्णिमा ने कहा… 10 जून 2010 को 5:19 pm

क्या समा बाँधा है,अच्छा लगा सुन कर.

 
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