उसका नूर और पटना की इशिता सिन्हा की मीठी आवाज़ .... बन्द आँखों में कल्पना का विस्तृत आकाश लिए चलिए कुछ मीठा हो जाए



















खोलिए आँखें खोलिए , देखिये ये क्या माज़रा है, जी हाँ देश की नई सशक्त आवाज़ श्रेया घोषाल को गीतों की लय में बांधकर आई हैं पुणे सिम्बायोसिस की अपराजिता कल्याणी .... इनको एक सूत्र में पिरोने का श्रेय जाता है खुशबू प्रियदर्शिनी को ... परिकल्पना का हँसता हुआ कारवां श्रेया घोषाल और अपराजिता कल्याणी के साथ ----





















3 comments:

ब्लाग बाबू ने कहा… 10 जून 2010 को 3:48 pm

भईय्या सुन्दर पोस्ट लगाई है, अब मैं खेलने जा रहा हूं???

mala ने कहा… 10 जून 2010 को 5:13 pm

सुन कर मन प्रसन्न हुआ.बधाई।

पूर्णिमा ने कहा… 10 जून 2010 को 5:20 pm

क्या समा बाँधा है,अच्छा लगा सुन कर.

 
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